क्या आप खुश रहना चाहते है? तो आईए लाईफ में हैप्पी इंडेक्स आसानी से बढ़ाए?
उदासी, मायूसी, निराशा, तनावग्रस्त और दुखी रहना किसी को पसंद नहीं है फिर भी कहते है पता नहीं क्यों यह सब हो रहा है। खुशी व आनन्द कोसों दूर जाता और पास आता कठिन दिखाई देता है।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है
यह बात सदैव दिल और दिमाग में रखना चाहिए इससे डरना नहीं चाहिए बल्कि साहस रख कर स्वागत करना चाहिए।
स्वयं के प्रति ईमानदार है तो अच्छी बात है और यदि नहीं है तो ईमानदार बनें और बनें रहें। आप जैसे है अच्छे है।
सबसे पहले खुद के बारे में सोचें फिर दूसरों के बारे में सोचें। अपनी खुशियों का दमन नहीं करके खुद को प्राथमिकता देना सीखें।
सपनों को मरने मत दीजिए। छोटे-छोटे सपने या इच्छाओं को पूरा करिए खुद के लिए।
परिवार, समाज व दोस्तों के बीच कुछ समय जरूर बिताया करें यही समय आपको अपूर्व खुशी व आनन्द देगा।

खुद पर इन्वेस्ट करिए:जो समय आप दूसरों के लिए तत्परता से खर्च कर देते है उसमें से पहले कुछ समय अपने लिए इन्वेस्ट करिए। शारीरिक व भावनात्मक मजबूती के लिए सुबह-शाम शुद्ध हवा में घूमना, योग, आसन, व्यायाम व ध्यान आदि के लिए पहले खुद के लिए समय जरूर निकालिए।
जो धन आप दूसरों के लिए उदार बन कर अधिकतम खर्च कर देते है उसमें से पहले कुछ धन खुद के लिए भी इन्वेस्ट करिए। खुद के संतुलित खान-पान व रहन-सहन पर भी खर्च करना सीख लें।
मदद करने को सदैव हाथ आगे रखें
जरूरत मंद, गरीब, विशेषजन व वृद्धों आदि के प्रति हृदय के कोने में कोमलता रखें और क्षमता व स्थिति अनुसार श्रम व धन से मदद अवश्य करना चाहिए। यह कार्य भीतर से असीम आनन्द और खुशी देता है।
किसी का दिल दुखाकर खुशी नहीं मिलती है
प्रयास ऐसा करें कि किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट का कारण आप बन सकें ना कि दिल दुखाने का कारण बनें।
स्वास्थ्य का पहिया कमजोर नहीं पड़ने दे
बीमारी कभी खुशी नहीं देती दुख ही दुख देती है।
स्वयं के संतुलित आहार-विहार, आचरण, वाणी और इन्द्रिय संयम में अनुशासित रह कर स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें। यदि आप स्वस्थ है तभी घर, परिवार व समाज में आप अपना बेहतर स्थान बना पाएंगे।
दोस्ती और सहयोग की भावना बढ़ाएं
अच्छे दोस्त बनाए और उनके साथ कुछ समय व वार्तालाप आपको भीतर तक खुशी भर देता है।
खुशी तो मुफ्त में मिलती है दोस्तों पर क्या करें? दिल है कि मानता ही नहीं पता नहीं यह तनाव कहाँ से आ जाता है! चिंताएं कहाँ से आ जाती है! आने दो यह सब कुछ समय के लिए विचलित जरूर कर देती है किंतु तुरंत संभलिए इन्हें हावी नहीं होने दीजिए।
खुशी तो बिखरी पड़ी है बस उसे ढूंढ़ने का अंदाज अपना बदलना है और फिर जितनी चाहे समेट लों आप खुशी समेटते-समेटते थक जाएंगे किंतु खुशी कम नहीं होगी।
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