तनाव मुक्ति हेतु और रोगों के लिए विटामिन सी कैसे आवश्यक है? जानिए!
विटामिन सी जल में घुलनशील है। व्यक्ति के सामान्यतः 25 से 30 मिलीग्राम विटामिन सी काफी होता है। ताजे फलों व सब्जियों में विटामिन सी अधिक पाए जाने के कारण इसे फ्रेश फूड के नाम से भी जाना जाता है। चिकित्सीय भाषा में इसे एस्कॉर्बिक अम्ल भी कहा जाता है।
विटामिन सी शरीर में जल्दी ही अवशोषित होकर खून के माध्यम से शरीर के उत्तकों में प्रवेश कर जाता है।
विटामिन सी अस्थि मज्जा, तिल्ली, यकृत, अग्नाश्य और आँख के रेटिना में सबसे अधिक संग्रहित होता है।

विटामिन सी के गुणकारी कार्य
विटामिन सी घाव व चोट आदि लगने पर एक सहायक विशेष प्रोटीन कोलेजन का निर्माण कर घाव व चोट को शीघ्र भरने का कार्य करता है। कोलेजन संयोजी उत्तकों में पाया जाता है जोकि उत्तकों को मजबूती के साथ जोड़ने का कार्य करता है और रक्त नलिकाओं को भी सुदृढ़ बनाता है।
बुखार, न्यूमोनिया, लाल तथा अन्य बुखार में विटामिन सी देना चिकित्सक आवश्यक समझते है।
विटामिन सी का प्रयोग कनफेड़ से पीड़ित होने पर सूजन, दर्द और बुखार नष्ट होने लगता है।
विटामिन सी काली खांसी में लाभदायक है।
विटामिन सी की कमी से स्कर्वी रोग होता है।
विटामिन सी एड्रीनल ग्रंथि से ऐपिनेफ्रीन और नॉरऐपिनेफ्रीन हार्मोन्स के स्रावित होने के लिए बहुत जरूरी है। यह दोनों हार्मोन्स दैनिक जीवन के तनाव व दबाव से मुक्त रहने, संक्रमण, एलर्जी, चोट व बीमारियों से रक्षा करने में मदद करता है।
विटामिन सी शरीर में लौह तत्त्व के अवशोषण में सहायता करता है। लाल रूधिर कणिकाओं में स्थित लौह तत्त्व को अवशोषित करता है।
विटामिन सी विटामिन ए और अनसेचुराईड वसा अम्ल को नष्ट होने से बचाने का कार्य करता है।
विटामिन सी गर्भपात रोकने के लिए बहुत सहायक है।
विटामिन सी के सेवन से खून की नलिकाओं की कठोरता समाप्त होकर लचीली बनी रहती है।
विटामिन सी आंखों की ज्योति बनाए रखता है एवं चुस्ती व फुर्ती का संचार करता है साथ ही नाक, कान व गला रोगों में यह रामबाण औषद्यी है।
विटामिन सी विषैले जीवन द्वारा काटने पर विटामिन सी का प्रयोग जलन, सूजन, वेदना व पीड़ा कम करता है।
विटामिन सी त्वचा को ताजगी प्रदान कर झुर्रिया व दाग-धब्बे दूर करता है।
विटामिन सी हृदय रोग संबंधी तकलीफों से बचाव करता है।
विटामिन सी के अच्छे स्रोत-
आँवला विटामिन सी का सबसे अच्छा व सस्ता स्रोत है क्योंकि अन्य महंगे विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों के बजाए आंवले में तुलनात्मक रूप से 20 गुना से भी अधिक विटामिन सी प्राप्त हो जाता है।
संतरा, मौसबी, नीबू, अमरूद, हरी व शिमला मिर्च, सेव, आंवला, पपीता, हरी पत्ते वाली सब्जियां, टमाटर आदि विटामिन सी के बहुत अच्छे स्रोत है। अंशतः दूध, अंडा, मांस, मछली, आलू, शकरकंद आदि जमीकंद में भी पाया जाता है।
अनाज व दालों में विटामिन सी समुचित रूप से नहीं पाया जाता है किन्तु इन्हें खमीरीकृत करके इनमें विटामिन सी की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
विटामिन सी की कमी से गर्भावस्था व गर्भावस्था की सूजन, मोतियाबिंद, जोड़ो में दर्द, पायरिया, मसूड़ों के रोग, अमाशय के घाव, बहते रक्तस्राव, थकान, आलस्य, त्वचा में झुर्रिया, संधिवात, लकवा, पक्षाघात, आमवात, श्वास रोगों की दस्तक, रोग प्रतिरोधक क्षमता का नाश, विटामिन सी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती है और हड्डियों के अंतिम छोर अथवा जुड़ाव अलग हो जाते हैं।
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