बच्चों को सफल देखना चाहते है तो उनकी भी सुने!
आपके माता-पिता ने आपको कैसे पाला और बढ़ा किया जरूरी नहीं कि आप भी अपने बच्चों की परवरिश वैसे ही करें।
- बच्चों की सफलता के लिए माता-पिता को बच्चों की भी सुननी चाहिए और उनकी बातों का सम्मान करना चाहिए।
अपने सिद्धान्तों तथा परम्परा में जबरदस्ती बांध कर रखना ठीक नहीं है। - गलत बातों या जिद्ध करने पर डांटना, मारना या फटकारना नहीं चाहिए बल्कि संयम के साथ दूसरा विकल्प तथा उदाहरण प्रस्तुत करके बात को संभालना चाहिए।
बच्चों का पढ़ाई से ध्यान नहीं भटके इसके लिए बच्चों की पढ़ाई के समय माता-पिता को अपने मोबाईल, टीवी या गपशप से दूर रहना चाहिए।
- बच्चों को रोज थोड़ा समय देना चाहिए। जब बच्चे पढ़ाई या होमवर्क कर रहे हो तब बच्चे के सामने ही रहना चाहिए और बच्चे की पढ़ाई में मदद करनी चाहिए।
- बच्चों के स्कूल में पेरेंटस टीचर मीटिंग, वार्षिक उत्सव या खेल आदि कार्यक्रमों में माता-पिता को जरूर हिस्सा लेना चाहिए।

कभी भी बच्चों को उलाहना, हतोत्साहित या प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। अधिक खेलने, टीवी देखने या इधर-उधर समय बीताने पर प्यार का सहारा लेना चाहिए। बच्चे को प्रोत्साहित करके उसका आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए। माता-पिता की प्यारी सी मुस्कान बच्चे को बहुत कुछ सीखा देती है।
- क्या सही है और क्या गलत है यह सब ज्ञान माता-पिता से बेहतर और कौन समझा सकता है किंतु वक्त तथा बदलती तकनीक के साथ बच्चों की मदद करनी चाहिए। माता-पिता ही बच्चे के प्रथम गुरू होते हैं।
- बच्चे अच्छे इंसान बन सकें इसलिए उनकी भी सुनना चाहिए। माता-पिता को केवल अपने पक्ष का अलाप ही नहीं अलापना चाहिए।
हर माता-पिता चाहते है कि जीवन के प्रत्येक कदम पर उनका बच्चा सफल होना चाहिए। इसके लिए बच्चों को अनुशासन का पाठ समझाया जाना चाहिए और इसका महत्त्व बताया जाना चाहिए।
दिमागी गतिविधियों में भी बच्चों में रूचि पैदा करनी चाहिए।
सदैव सकारात्मक सोच का विचार विकसित करना चाहिए। असंभव कुछ नहीं ऐसा पाठ बचपन से बच्चों को पढ़ाना चाहिए। बच्चों को उनके छोटे छोटे कामों पर प्रोत्साहित करना नहीं भूलना चाहिए
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