सूर्य स्नान कब और कैसे किया जाए?
सूर्य किरणों में औषद्यीय प्रभाव छिपे हुए है। बिना पैसा व अधिक समय खर्च किए बिना ही मुफ्त में स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है।
सूर्योदय व सूर्यास्त के समय निश्चित समय पर सूर्य दर्शन करना हितकारी है। इस समय सूर्य से अल्ट्रावायलेट किरणों का अभाव रहता है। इस समय 15-20 सैकण्ड अपलक सूर्य का दर्शन किया जा सकता है। आँखों की ज्योति तीव्र होती है और अन्य रोगों का निदान होता है साथ ही आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।

शौच व स्नानादि से निवृत्त होने के बाद प्रातः सूर्योदय के समय थोड़ी देर धूप में बैठकर सूर्य स्नान लेना चाहिए। इस समय शरीर पर कम से कम वस्त्र या हल्के कपड़ों में सूर्य स्नान लेना चाहिए। खुले बदन सूर्य स्नान हितकारी है।
सूर्यतप्त पानी का सेवन करना। सूर्य की किरणों में बहुत शक्ति है, इन किरणों से पानी तप्त करके पीने से अनेक जटिल से जटिल रोग भी मिटने लगते हैं।
पानी को सूर्यतप्त कैसे करें-
काँच की सफेद बोतल को अच्छी तरह साफ करें। बोतल की मोटाई वाले हिस्से तक साफ पानी भर दें अर्थात् बोतल की गर्दन खाली रहें। बोतल का मुँह कस कर बंद कर दें। बोतल को लकड़ी का पट्टा या टुकड़े पर धूप में रखें। सात-आठ घंटे बोतल धूप में रहें। बोतल के खाली जगह पर पानी की बूंदे इकट्ठी हो जाएगी। सूर्य ढ़लने से पहले ही बोतल को लकड़ी का पट्टा सहित घर के भीतर छाया में लाकर रख दें। दिन में तीन-चार बार एक-एक कप इस पानी का सेवन किया जा सकता है। सफेद पानी की बोतल का पानी प्राकृतिक रूप से भरपूर कैल्शियम से युक्त हो जाता है। कैल्शियम की गोलिया खाने की नौबत ही नहीं आती है।
सूर्य किरण से तप्त अन्य रंगों की कांच की बोतले से तप्त पानी भिन्न-भिन्न रोगों में बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुआ है।
पानी के अतिरिक्त तेल, देशी चीनी व शहद आदि भी सूर्य तप्त किए जा सकते हैं जिनके प्रयोग से विविध रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।
सावधानी-अधिक गर्मी अर्थात् तीव्र धूप में सूर्य दर्शन व स्नान से बचना चाहिए।
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