रिटायरमेंट के बाद भी रूकना नहीं Do not stop even after retirement

रिटायरमेंट के बाद भी रूकना नहीं-

रिटायरमेंट कोई दयनीय स्थिति नहीं है बल्कि यह तो जीवन की दूसरी श्रेणी जीने का अगला सफर है।
रिटायरमेंट होते ही अपनी बढ़ती उम्र को लेकर चिंता, नकारात्मक विचार या डर को अपने से दूर रख लेना चाहिए।

अपने सपनों को सीमित नहीं करें। दिल में वहीं जज्बा और जोश बनाए रखें जैसाकि रिटायरमेंट तक बनाए रखा था।

रिटायरमेंट के कुछ वर्ष पहले से ही अपने स्तर का कार्य खोजना शुरू कर देना चाहिए जहां आपकी जरूरत हो। फिर से काम शुरू कर देने या व्यस्त रहने का मानस बना डालिए।

रिटायरमेंट के बाद बेकार की वस्तु के जैसे या फालतू बनने का लेबल अपने माथे पर मंढ़ना ठीक नहीं।

खुद को एक बार फिर से खोजिए और लग जाए मनचाहे कार्यों पर जो दिल व मन को सुकुन दे सकें और आपको स्वस्थ रख सकें। सामाजिक मेल-मिलाप के मौके बनाए व संजोए रखें।

नौकरी के दौरान एक बंधी जगह थी अब बाहर की दुनियां को अपने प्राप्त अनुभवों के आधार पर देखने का अच्छा समय है।

परिवार से मतलब रखिए नहीं परिवार आपसे मतलब नहीं रखेगा।

रिटायरमेंट के बाद भी जो चाहे बन सकते हैं और कर सकते हैं किंतु दिमाग ही बस उसकी इजाजत नहीं देता इसलिए पूरे मन और जोश को अभी भी धूमिल मत होने दिजिए और कुछ कर गुजरने की भावना प्रसारित कर जिंदगी आनन्द और उल्लास से जीने की ललक पैदा कर लेनी चाहिए।

नए एंगल की तलाश करना जरूरी है यदि रिटायरमेंट के बाद मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते है अन्यथा दुर्भावनाएं, समस्याएं, नकारात्मकता और दुःख के प्रवाहन का आवरण सा छाने की संभावना बढ़ जाती है।

रिटायमेंट के बाद व्यस्त रहने की छोटी सी रिस्क तो ले ही सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद जिंदगी रूकती नहीं। कहीं न कहीं या कोई न कोई काम नहीं करेंगे तो जिंदगी जरूर बीमार सी लगती है।

बुजुर्ग होने से पहले ही युवाओं को अपने तौर-तरिके बदल लेने चाहिए।

यदि यह बोलेंगे कि रिटायरमेंट हो गया है अब इतनी एनर्जी और क्षमता कहां से लाएंगे तो एक बात बताईए कि

यदि रिटायरमेंट की उम्र 60 की जगह 65 या 70 हो जाए तो क्या कुछ अपवाद छोड़कर नौकरी खुद-ब-खुद छोड़ देंगे। नहीं ना! तब भी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण के साथ जानबूझ कर कभी नौकरी नहीं छोड़ी जा सकेगी और तब भी क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रिटायरमेंट की अवधि तक नौकरी व पद पर बने रहने का ही प्रयास किया जाता रहेगा।

इसका अर्थ यही रहा कि कोई भी काम करिए अपनी पसंद का जरूर हो इससे आपकी मानसिक और शारीरिक शक्ति क्षीण नहीं होगी बल्कि नई ऊर्जा का अद्भुत प्रवाहन आपके भीतर स्वतः ही होने लगेगा और कमजोर नहीं अपितु और मजबूत व सक्षम महसूस करने लगेंगे। उम्र बढ़ने का मतलब जीना और काम करना बंद कर देना बिल्कुल नहीं है बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी बिन्दास जीते जाना है।

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