गेस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण कारण और उपाय क्या है-
जब खाया हुआ भोजन 3-4 घंटे के बजाए 12 घंटे से अधिक समय में पचे और इसके बाद भी पेट भरा-भरा हुआ लगे तो यह भी एक प्रकार की बीमारी है। ऐसी स्थिति में पेट अपने आप खाली नहीं हो पाता है और इसे गेस्ट्रोपेरेसिस कहा जाता है।

गेस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण क्या है?
हमेशा पेट भरा हुआ महसूस होता है।
पेट फूलने की समस्या हो जाती है।

भूख नहीं लगती है।
मितली आना (कै), उल्टी होना, पेट में दर्द, ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव होना, वजन मंे कमी, शरीर में पोषक तत्त्वों के साथ कमजोरी का अनुभव होना।

गेस्ट्रोपेरेसिस के कारण क्या है?
विटामीन बी 12 की कमी मुख्य कारण है।
बढ़ती उम्र के कारण शरीर की नसों व नाड़ियों में कमजोरी आना।
वजन की अधिकता होना।
पेट में गांठ या अल्सर होना।
पेट की लाइनिंग पर मौजूद वेगस नसों के कमजोर हो जाने से पेट के कार्यों की गति और क्षमता कम हो जाती है जिससे खाए हुए भोजन का हलन-चलन सही नहीं हो पाता है और पेट भरा हुआ अनुभव होता है।
हाइपोथायराईड, डायबीटिज, जेनेटिक या पेट के किसी अंग के ऑपरेशन के बाद उत्पन्न बीमारी से भी गेस्ट्रोपेरेसिस की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
गेस्ट्रोपेरेसिस का आसान उपचार क्या है?
पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए पेट की सूक्ष्म यौगिक क्रियाएं की जानी चाहिए।
तेज गति से भ्रमण और हल्का-फुल्का व्यायाम करना चाहिए।

गेस्ट्रोपेरेसिस के रोगी को अपना खान-पान व जीवनशैली संतुलित रखनी चाहिए।
रोगी को पोषक तत्त्व वाला आहार थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाना चाहिए।

अधिक तला, भुना, मिर्च मसालेदार व फाईबर युक्त आहार नहीं लेना चाहिए।
गेस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण कारण और उपाय पहचानने चाहिए और गेस्ट्रोपेरेसिस के रोगी को तरल और गरिष्ठ भोजन की मात्रा समान रखनी चाहिए। उल्टी, मितली या अन्य समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श अनुसार डाईट-प्लान व औषद्यी का सेवन किया जाना चाहिए।
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