वायरस से डरे नहीं – सावधानी बरतें
स्वाइन फ्लू, जीका, डेंगू, चिकनगुनिया, निपाह तथा एक और नया वायरस वेस्ट नील आदि का कुछ वर्षों से प्रकोप बढ़ रहा है। इन सबसे डरने के बजाए सावधान रहने की अधिक आवश्यकता है।
वायरस का संक्रमण एक-दूसरे से अधिक फैलता और प्रसारित होता है। भीड़ वाले स्थानों पर इन बीमारियों का प्रसारण अधिक होने की संभावना रहती है। इलाज से बेहतर उपाय है।

संक्रमित रोगी के खांसते-छींकते समय हवा में रोगों के कण प्रसारित होने के कारण अन्य को भी यह रोग संक्रमित कर देता है या वायरस से प्रभावित चीजों को छूने से भी संक्रमण फैलने की प्रबलता रहती है।
संक्रमित रोगियों के साथ वस्तु का आदान-प्रदान नहीं करना चाहिए और रोगी का आइसोलेट रहना अच्छा है।
छींकें, खाँसी या नाक बहने की स्थिति में मास्क, टिशू पेपर या रूमाल आदि नाक और मुँह पर रखना चाहिए और एक बार काम में लेकर टिशू पेपर फैंक देना चाहिए और रूमाल या कपड़ा आदि अच्छे साबुन से धो व साफ करके धूप में सुखाना चाहिए।
जिन स्थानों पर बार-बार हाथ लगता हो उन स्थानों को स्वच्छ रखना जरूरी है। बार-बार हाथों को अच्छे तरीके से साफ करते रहना चाहिए।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। विटामिन सी एव विटामिन डी युक्त पदार्थों के साथ तरल पदार्थों का भी पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। दूषित व संक्रमित खाद्य पदार्थों से दूर रहकर शुद्ध तथा स्वच्छ भोजन किया जाना चाहिए।
बाजार, शादियों, कार्यक्रमों, मॉल्स, सिनेमाहॉल व मेलों आदि में जाएं तो मॉस्क लगाकर जाने में शर्म नहीं करनी चाहिए।
अधिक बुखार, खाँसी, गले में खराश, छींकें, नाक से पानी का लगातार बहना, जुकाम से नाक बंद होना, थकान व मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव होते ही तुरंत चिकित्सीय परामर्श व उपचार लेना चाहिए।
हर रोज नए नाम से वायरस उभर कर सामने आ रहा है घबराने के बजाए सावधानी रखना अच्छा उपाय है।
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