रात को नींद ढंग से क्यों नहीं आती? नींद नहीं आना आज के समय में एक बीमारी का हिस्सा बन चुका है जिसके साथ अन्य और रोग भी आसानी से लग जाते हैं। अनहेल्थी आदतें अच्छी नींद नहीं आ पाने का मुख्य कारण है। नींद की दवाईयां बिना चिकित्सक के दिशा-निर्देश में नहीं लेनी चाहिए। मर्जी से नींद की दवाईयां लेने से नींद का तंत्र असंतुलित हो जाता है।

सामान्यतः अधिक उम्र में शरीर की जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है जिससे सोने व जागने की आदत प्रभावित होती है।
एंजायटी या अवसाद की स्थिति मंे मूड में बार-बार उतार-चढ़ाव होता है और नींद में विघ्न आता है।

जंक फूड खाने के कारण भी नींद पूरी नहीं हो पाती है। नींद पूरी नहीं होने की वजह से एंजायटी उत्पन्न होती है और यह लजीज और वसा युक्त आहार खाने के लिए आकर्षित करती है। जिससे जंक फूड खाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। जब भी भूखे होते हैं तो दिमाग कार्बोहाईड्रेट्स और वसा युक्त भोजन के लिए निर्देशित करता है और हम यही भोजन ढूंढ़ कर तृप्ति भी करते हैं। आज भोजन के लिए इतने विकल्प है और हम सादा तथा परम्परागत भोजन पीछे छोड़ते आ रहे हैं।

शरीर में हाथ-पैरों में दर्द या स्लीप एप्निया के कारण भी नींद गड़बड़ाती है।
पुरूषों में प्रोस्टेट ग्रंथि में समस्या होने के कारण रात को बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है जिससे गहरी नींद का अभाव हो जाता है।
सोने से पहले नशा करना या खाना खाते ही रात को सो जाने के कारण भी नींद अच्छी नहीं आती।

दिन में कई बार या बहुत देर तक सोना, चाय-कॉफी का बहुत अधिक सेवन करना मस्तिष्क में उन रसायनों के स्राव को बाधित करते हैं जोकि अच्छी नींद लाने में सहायक होते हैं।

नींद अच्छी आए इसके लिए क्या करें?
सबसे पहले सोने और जागने का समय निश्चित करें।
रात को सोने से दो घंटे पहले तक टीवी, मोबाईल, कम्प्यूटर व लेपटाप आदि का साथ छोड़ दें क्योंकि इनकी रोशनी से मस्तिष्क में नींद का तंत्र गड़बड़ा जाता है।
सोने वाला स्थान या कमरा में तेज रोशनी नहीं होकर अंधेरा होना चाहिए साथ ही शांत और सामान्य तापमान का होना चाहिए।
रोज व्यायाम करना चाहिए। सुबह दैनिक क्रियाएं करने के बाद और रात्रि सोने से दो घंटे पहले व्यायाम किया जा सकता है। रात को खाने और सोने के बीच दो घंटे का अंतर होना चाहिए।
खाना खाने के तुरंत बाद सोने से हार्टबर्न, अपच और गैस जैसी शिकायतें प्रकट हो जाती है।
8 घंटे सोने वाले व्यक्ति में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन्स का स्तर कम होता है जबकि 4-5 घंटे सोने वाले व्यक्ति में भूख बढ़ाने वाला हार्मोन्स का स्तर अधिक होता है।
शरीर में स्थित एंडोकैनाबिनायड सिस्टम भूख, सूजन, दर्द, नींद व शरीर की क्रियाओं को संतुलित रखता है। यही सिस्टम अधिक वसा (फैटी), स्टार्च और शर्करा युक्त खाना खाने के लिए उन लोगों को बाध्य करता है जिनकी नींद पूरी नहीं होती है और अनाप-शनाप खाने के लिए स्वतः ही बाध्य करता है, इसीलिए रात को ढंग से नींद नहीं आती है।
Leave a Reply