डायबिटीज के बारे में झूठी और सही बातें क्या है?
झूठ है कि डायबिटीज की जाँच भूखे पेट चाय पीकर ही करवानी होती है-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज की जाँच सुबह बिल्कुल भूखे पेट या केवल पानी ही पीकर करवाई जा सकती है।
झूठ है कि दुबले-पतले और कमजोर लोगों को डायबिटीज कभी नहीं होती हैं-
बल्कि सच यह है कि यह दुबले-पतले और कमजोर लोगों को भी डायबिटीज हो सकती है किंतु मोटे लोगों में अधिक आशंका रहती है।

झूठ है कि डायबिटीज एक संक्रामक रोग हैं-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज आनुवांशिक, खराब जीवन-शैली, दूषित आहार-विहार और हार्मोन्स संबंधी रोग है। यह एक-दूसरे से बतौर संक्रमण से फैलने वाली बीमारी नहीं है।
झूठ है कि डायबिटीज रोग खुद ही जड़ से ठीक हो जाता है और दवा लेने की आवश्यकता ही नहीं होती हैं-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज के प्रारम्भिक स्तर पर नियमित व्यायाम, संतुलित और हैल्दी डाईट व आहार-विहार से नियंत्रित किया जा सकता है किंतु डायबिटीज टाईप 1 आनुवांशिक कारण और डायबिटीज टाईप 2 खराब जीवन-शैली, दूषित आहार-विहार और हार्मोन्स संबंधी रोग है। दीर्घ अवधि से चली आ रही डायबिटीज जटिल रोगों में आती है और इसके लिए जीवन-भर दवाई लेने की जरूरत होती है।

झूठ है कि डायबिटीज में एक बार इंसुलिन लेने के बाद इसकी लत या आदत हो जाती है-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज में डॉक्टर की सलाह पर ही आवश्यकता के अनुसार ही ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन दी जाती है।
झूठ है कि डायबिटीज की दवा एक जैसी होती है जिसे कोई भी किसी की भी दवा ले सकता है?
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज की दवाई रोगी की शारीरिक, मानसिक और रोग की स्थिति, वजन डायबिटीज का प्रकार, अवधि तथा गुर्दों की स्थिति के अनुरूप डॉक्टर द्वारा निश्चित की जाती है। घर के सदस्यों द्वारा ली जाने वाली दवाई चिकित्सक द्वारा अलग-अलग दी जाती है, सभी को एक जैसी दवाई नहीं दी जा सकती है।
झूठ है कि डायबिटीज में सरसों के तेल से वजन बढ़ता है-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज रोगी के लिए सरसों का तेल सर्वश्रेष्ठ है जिसे सूरजमुखी के तेल के साथ मिलाकर भी प्रयोग किया जाना अच्छा है।

झूठ है कि डायबिटीज रोगी फल नहीं खाकर केवल ज्यूस पीने पर ध्यान दें-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज रोगी द्वारा रस के बजाए चिकित्सक के निर्देश में कम से कम पाव भर से आधा किलो तक फल (चीकू, आम, पके केले, लीची, अंगूर, सीताफल व अन्य मीठे फलों को छोड़कर) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खाए जा सकते हैं क्योंकि फलों में फाईबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है और फाइबर डायबिटीज रोगी के लिए उत्तम है।
झूठ है कि डायबिटीज में कोलेस्ट्रोल फ्री तेल खाना चाहिए-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज रोगी के लिए 3-4 चम्मच तेल खाना ही काफी है और दूसरी खास और विशेष बात यह है कि कोलेस्ट्राल फ्री तेल होता ही नहीं है क्योंकि किसी भी वनस्पति तेल में कोलेस्ट्राल नहीं होता है। सभी तेलों में गुणवत्ता तो अलग-अलग होती है किंतु वसा समान होती है और इनसे प्राप्त होने वाली कैलोरी समान होती है। कोई भी तेल हल्का या भारी नहीं होता है। कोई भी तेल सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।
झूठ है कि डायबिटीज के लिए ग्लूकोमीटर और लेब की जाँच में बहुत अंतर पाया जाता हैं-
बल्कि सच यह है कि ग्लूकोमीटर और लेब की जाँच में 10-15 प्रतिशत का अंतर पाया जा सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाला ग्लूकोमीटर से भी सही जाँच संभव है।

झूठ है कि डायबिटीज रोगियों के लिए उम्र के हिसाब से वजन बढ़ना आवश्यक है-
बल्कि सच यह है कि बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर वजन नियंत्रित किया जाना चाहिए।
झूठ है कि डायबिटीज रोग का विदेश में जड़ से नाश हो जाता है-
बल्कि सच यह है कि डायबिटीज का उपचार समस्त विश्व में एक जैसा ही होता है।
झूठ है कि डायबिटीज रोग में घाव बहुत देर से भरते हैं इसलिए सर्जरी जैसी स्थिति से सदैव बचना चाहिए-
डायबिटीज के बारे में एक सच यह भी है कि रोगी को आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक के दिशा-निर्देश में सर्जरी करवा ली जानी चाहिए क्योंकि डायबिटीज नियंत्रित हो जाने के बाद घाव भी जल्दी ही भरने लगते हैं।
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