केगेल व्यायाम स्ट्रेस इनकनटिनेंस में लाभकारी हैं? Kegel Exercises Beneficial in Stress incontinence

केगेल व्यायाम स्ट्रेस इनकनटिनेंस में लाभकारी हैं-रोगी को शिकायत रहती है कि केवल छींकने, खाँसी आने, जोर से हँसने या कोई भारी सामान उठाने से बिना इच्छा के भी स्वतः ही पेशाब निकल जाता है इस रोग को स्ट्रेस इनकनटिनेंस कहा जाता है। केगेल व्यायाम इस रोग में लाभकारी हो सकता है।

स्ट्रेस इनकनटिनेंस तकलीफ क्या है?

जब मूत्र मार्ग का छिद्र ज्यादा खिंच जाता है तब इसका लचीलापन समाप्त सा हो जाता है। जब पेट के निचले हिस्से पर अधिक दबाव पड़ता है तब मूत्र बिना किसी नियंत्रण के अपने आप ही निकल जाता है। जिस कारण रोगी के कपड़े बार-बार खराब होने का डर रहता है और कभी-कभी शर्मिन्दा भी होना पड़ सकता है।

स्ट्रेस इनकनटिनेंस के कारण क्या है?

इस रोग के मुख्य कारण महिलाओं का बार-बार माँ बनना, लम्बा प्रसव काल, मेनोपॉज की स्थिति, अल्कोहल, एंटी डिप्रेसंट्स, अवसाद शामक औषद्यियां, अत्यधिक भय एवं तनाव तथा पुरूषों में प्रोस्टेट ऑपरेशन के बाद यह समस्या पनप सकती है।

स्ट्रेस इनकनटिनेंस से मुक्ति पाने का सरल उपचार क्या है?

केगेल व्यायाम इस रोग से मुक्ति पाने में बहुत ही लाभकारी है। इस व्यायाम के नियमित अभ्यास से मूत्र मार्ग के आस-पास के पेशियों को बल मिलता है।

केगेल व्यायाम कैसे करें?

पहली विधि

पीठ के बल लेट जाएं और अपनी जांघों के बीच एक मोटा तकिया रखें। लम्बा गहरा श्वास लें और जांघों से तकिए को जोर से दबाएं। क्षमता व सामर्थ्य अनुसार तकिए को दबाते हुए श्वास रोकें रहें। फेफड़ों में श्वास की कमी महसूस होते ही तकिए को जांघों से ढ़ीला छोड़े। पुनः लम्बा गहरा श्वास लें। तकिए पर जांधों से दबाव दें और छोड़े। यह क्रिया तीन मिनट तक करें और सबुह-शाम करें।

दूसरी विधि

यह विधि कहीं भी की जा सकती है। यह भी बहुत आसान है। खड़े रहकर, बैठकर या लेटे हुए जब मर्जी हो की जा सकती है। जिस प्रकार मल-मूत्र के आवेग को रोकने का प्रयास किया जाता है। इसी प्रकार यह व्यायाम किया जाना है। ध्यान रहें यह व्यायाम मल एवं मूत्र विसर्जन के बाद की करना है। वास्तव में मल-मूत्र रोकना नहीं चाहिए।

मल-मूत्र विसर्जन के बाद या दिन में कभी भी जब मल-मूत्र विसर्जन की भावना से रहित हो तब लम्बा गहरा श्वास लें और मल-मूत्र के स्थान की मांसपेशियों को संकुचित करें अर्थात् ऊपर की ओर खींचे क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रूक रहें और फिर धीरे-धीरे श्वास बाहर की ओर छोड़ते हुए मांसपेशियों को ढीला छोड़े दें। पुनः यही क्रिया करें। क्षमता व सामर्थ्य अनुसार लम्बा गहरा श्वास लेते हुए मांसपेशियों को अधिकतम खीचें और रोक कर रखें फिर मांसपेशियों को शिथिल कर दें। इसी प्रकार दिन में कम से कम 15-20 बार इस क्रिया का अभ्यास कहीं भी किया जा सकता है।

केगेल व्यायाम के लाभ-

केगेल व्यायाम स्ट्रेस इनकनटिनेंस में लाभकारी हैं, इसके नियमित अभ्यास से जांघो, मल-मूत्र विसर्जन के आस-पास तथा ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां संकुचित होती है। इस कसरत के प्रयोग से ढीली पड़ी मांसपेशियों में कसाव आता है। स्त्री और पुरूष दोनों ही यह व्यायाम कर सकते हैं।

सावधानी-मल-मूत्र के आवेग को कभी रोकना नहीं चाहिए। बार-बार ऐसा अभ्यास अनेक बीमारियां पैदा कर सकता है। दिन में 5-6 घंटे तक पेशाब रोककर रखना गंदी आदत है। हर दो-तीन घंटे में मूत्र विसर्जन के लिए जाना ही चाहिए।

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