प्रोस्टेटाईटिस कारण व सरल उपचार क्या है? What is prostatitis causes and simple treatment?

प्रोस्टेटाईटिस कारण व सरल उपचार क्या है-

जब भी मूत्र विसर्जन करने जाते है तब पेशाब करते समय जलन का अनुभव होना या चुभने जैसा दर्द का उठना प्रोस्टेटाइटिस का संकेत है। यह समस्या लिंगोत्थान या स्खलन के वक्त भी बहुत पीड़ा दायक स्थिति उत्पन्न कर देती है।

इस समस्या के प्रकट होने के बाद बुखार आना, मूलाधार अर्थात् पेरिनीयम (लिंग और गुदा द्वार के बीच का स्थान) में, अण्डकोशों की थैली (स्क्रॉटम), पीठ के नीचे वाले भाग तथा जांघों के ऊपरी भागों में दर्द होता है।

अधिकतम पुरूषों को 40 वर्ष के बाद यह परेशानी कभी न कभी जरूर होती दिखाई देती है।

तीव्र संक्रमित प्रोस्टेटाईटिस प्रोस्टेट ग्लेण्ड (पौरूष ग्रन्थि) में सूजन आने के कारण मुख्यतः होती है। ई. कोलाई बैक्टिरिया मूत्र मार्ग (यूरेथ्रा) व मूत्राशय (ब्लेडर) में पहुँचकर प्रोस्टेट तक पहुँच जाते हैं।

प्रोस्टेटाईटिस का मुख्य कारण क्या है?

लगातार बैठे रहना- अधिक समय तक लगातार एक ही स्थान पर बैठ कर कार्य करने से प्रोस्टेट पर अधिक दबाव पड़ने लगता है या कभी-कभी वहाँ खून जमा हो जाता है।

सेक्स में अधिकता करना-बार-बार या लगातार सेक्स करना।

तनाव की निरंतरता-तनाव अधिक करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह ध्वस्त होने लगती है। तनाव का उच्च स्तर निरंतर बने रहने से पेल्विक स्थान की मांसपेशियां तन जाती है और ऐंठन उत्पन्न हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप पेशाब भी अच्छी तरह और पूर्ण रूप से बाहर नहीं निकल पाता है और पेशाब वापस प्रोस्टेट ट्यूब में चला जाता है और परिणाम सूजन और दर्द के रूप में प्रकट हो जाता है।

अल्कोहल का सेवन-अधिक अल्कोहल का सेवन करने से अल्कोहल सीधे प्रोस्टेट को नुकसान पहुँचा सकता है और वहाँ सूजन भी उत्पन्न कर देता है।

तेज मसालों का प्रयोग-तेज मसालों को पाचन तंत्र पूरी तरह सरलता से ग्रहण नहीं कर पाता है। यह तेज मसालें मलाशय (रेक्टम) में जमा होकर धीरे-धीरे प्रोस्टेट तक पहुँच जाते हैं क्योंकि प्रोस्टेट मलाशय के पास ही स्थित होता है।

प्रोस्टेट छत्तें की तरह बना होता है और संक्रमण को पूरी तरह अपने अंदर जज्ब कर लेता है।

सरल उपचार क्या है?

सबसे पहले समस्या की जाँच करवा लें।

नारंगी, गाजर, चुकंदर, सेब, पालक का खीरा का रस तथा अजवायन का पानी पीने से प्रोस्टेट संबंधी रोगों से आसानी से बचा जा सकता है।

सीलीकान की कमी से प्रोस्टेट में दर्द हो सकता है। इन्हें भोजन में अधिकतम शामिल करें। भोजन अधिकतम रेशेदार हो। सफेद प्याज, अंजीर, पत्तागोभी, खीरा व मूली आदि का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग करें।

मल-मूत्र विसर्जन के बाद ही कसरत, व्यायाम, योग तथा ध्यान आदि करें।

लगातार एक ही जगह बैठे नहीं रहें। हर पौन घंटे में अपने स्थान से उठें।

खाँसी-जुकाम, दस्त, हैजा या अवसाद दूर करने वाले एंटीबायोटिक सिरप भी ब्लैडर को कमजोर बना सकते हैं।

ब्लैडर को हमेशा स्वस्थ और स्वस्थ रखें इसे अनावश्यक खींचने नहीं दें। पेशाब रोकने की बुरी आदत छोड़ दें।

कायोत्सर्ग अथवा योगनिद्रा अथवा विश्रामासान अथवा शवासन के प्रयोग दिन में एक बार तो जरूर करें।
प्रोस्टेटाईटिस कारण व सरल उपचार जानकर लें, भोजन ऐसा ले जिससे पेट में कब्ज बिल्कुल नहीं रहें अन्यथा प्रोस्टेट पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

गुनगुने पानी का कटि स्नान लें।

पेट पर गर्म-ठण्डी लपेट लें।

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