पेट भरने की सूचना दिमाग तक पहुँचेगी तभी खाया हुआ भोजन अच्छी तरह से पच पाता है और अच्छे रसों का श्राव हो पाता है।जल्दी-जल्दी खाना खाने से लिवर पर बुरा असर पड़ता है और पित्त रस का स्राव अच्छी तरह नहीं हो पाता है।
जल्दी-जल्दी खाना खाने से आंतों में भोजन बहुत देर तक पड़ा रहता है क्योंकि इस तरह खाए गए भोजन में पाचक एंजाइम कम उत्पन्न होता है जिसके कारण पेप्टिक व डिडोनम अल्सर की आशंका भी हो जाती है।

जल्दी-जल्दी खाना खाने से अग्नाशय रस कम मात्रा में स्रावित होता है। पैंक्रियाज के भलीं-भांति कार्य क्षमता बनाए रखने के लिए अग्नाशय रस का स्राव होना बहुत जरूरी है अन्यथा मधुमेह रोग आदि उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
जल्दी-जल्दी खाना खाने से दांतों का काम (पीसने का काम) आंतों को करना पड़ता है। अधिक भार की वजह से एसिडिटी, गैस, कब्ज व अल्सर की समस्याएं प्रारम्भ हो जाती है।

जल्दी-जल्दी खाना खाने से मुँह में स्रावित होने वाली लार भोजन में अच्छी तरह घुल नहीं पाती है। लार में एमाइलेज एंजाईम होता है। इसके कम होने से भोजन अच्छी तरह पच नहीं पाता है और खट्टी डकार, पेट फूलना, भारीपन या मुँह में भोजन आना जैसी परेशानियां उत्पन्न हो जाती है।

जल्दी-जल्दी खाना खाने से पेट भर गया है या नहीं भरा है इसकी सूचना दिमाग तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाती है और मस्तिष्क को यह नहीं पता चलता है कि पेट भर गया है या नहीं भरा है क्योंकि पेट भरने की सूचना दिमाग तक पहुँचने में पन्द्रह-बीस मिनट लगते है।

जल्दी-जल्दी खाना खाना से और अधिक खाने की इच्छा होती है क्योंकि दिमाग तक पेट भरने की सूचना नहीं पहुँची होती है और अनावश्यक भोजन अधिक मात्रा में कर लिया जाता है।
जल्दी-जल्दी खाना खाने से ब्लड शुगर में बार-बार परिवर्तन होता है और तेजी से वजन भी बढ़ता है।
जल्दी-जल्दी भोजन करने से बचें और तीन-चौथाया पेट भरने लायक ही भोजन करना चाहिए अर्थात् एक चौथाया पेट खाली छोड़ देना चाहिए।
Leave a Reply