स्वास्थ्य को वापस लाईए-प्रकृति से आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करें।
अंदरूनी बीमारी का कारण आप जो भोजन कर रहें है उसका व्यर्थ जाना है।
प्रकृति के बनाए संतुलन को मानिए इसे खत्म करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। प्रकृति की सीधी राह पकड़िएं। प्रकृति की स्वाभाविक खुराक ही खाई जानी चाहिए।
प्रकृति की ओर देखकर खुद को स्वस्थ बनाने का प्रयास करें।
कोई मोटा होता है कोई बिल्कुल पतला होता है। व्यक्ति-व्यक्ति के शरीर में भिन्नता पाई जाती है। आकार व प्रकार में अंतर होता है।
क्या मोटा होना आनुवांशिक या खानदानी है? नही,ं खान-पान एव ंआहार-विहार आनुवांशिक या खानदानी होती है।
क्या मोटा या पतला किसी बीमारी के कारण होता है? नहीं, खान-पान एव ंआहार-विहार का गलत होना या असंतुलित होना बीमारी का कारण है।
क्या उम्र के हिसाब से मोटा हो जाना स्वाभाविक है? नहीं, खान-पान एव ंआहार-विहार ही मोटापा का मुख्य कारण है।
क्या मानसिक बीमारियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलती है? नहीं, जीवन-शैली व आहार का तरीका ही मानसिक बीमारियों का कारण है।
अगर बच्चों की खाने व पीने की आदते बदल दी जाए और भोजन को प्राकृतिक और संतुलित रूप से बच्चों को दिया जाए तो संभव है कि बच्चों से इनके माँ-बाप से मिलने वाली बीमारियां भी जाती रहें।
क्या सभ्यता और स्वास्थ्य का मेल नहीं बन सकता है? भोजन में हरी सब्जियाँ, पत्तेदार साग, फल, रस, अंकुरित अनाज व दूध का सेवन जहाँ तक हो सकें असली रूप में ही सेवन किया जाना चाहिए।
बार-बार याद रखिए शरीर में जैसा भोजन जाएगा शरीर भी वैसा ही बनेगा और विकास होगा। प्रकृति के पदार्थों को नष्ट करके नहीं खाया जाएं तभी अच्छा आहार शरीर को आसानी से मिल सकता है।
सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्ति को भी तुरंत उचित श्रम और प्राकृतिक भोजन पर ध्यान दे देना चाहिए जिससे लम्बी व स्वस्थ आयु आसानी से जी सकें।
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