कब्ज एक बीमारी सौ सरल घरेलू उपचार-
शरीर से नियमित मल नहीं निकलने पर मल की गंदगी और विषैले तत्त्वों को आंतों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

कब्ज के कारण कई रोग-
चर्म रोग, सिर दर्द, अनिद्रा, अम्लता, छालें, सांस की बदबू, आर्थराईटिस, गठिया, मितली, अपेंडिसाईटिस, उच्च रक्तचाप, बवासीर, हर्निया, चक्कर, जी घबराना, भूख में कमी, वात व पित्त प्रकोप, मुंह में घाव, पेट में अम्लता, जलन, हृदय विकार, डायरिया,मोतियाबिन्द, स्नायु तंत्र का कमजोर होना, रक्त दोष, मानसिक तथा शारीरिक थकान आदि बीमारियां प्रकट हो सकती हैं।

जुलाब व कब्ज निवारक दवाईयों से बचें इनके नियमित प्रयोग से स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। आंते दवाईयों के प्रभाव से कमजोर व शिथिल पड़ जाती है संकुचन क्रिया का प्रभाव जाता रहता है।
कब्ज निवारक औषद्यियां पाचन तंत्र व मल निष्कासन तंत्र से तरल पदार्थ काफी मात्रा में सौंख लेती है इसके साथ पोटेशियम, विटामीन व खनिज लवणों आदि भी शरीर से बाहर निकल जाते है जिससे रोगों को प्रकट होने का अवसर मिल जाता है। औषद्यियां कृत्रिम रूप से उत्तेजक पदार्थ उत्पन्न करती है।
प्राकृतिक रूप से कब्ज कैसे दूर करें-
एक ग्लास पानी में नीबू व शहद मिलाकर रात्रि पीकर सोने से प्रातः मल खुलकर बाहर निकलता है।
गेहूँ का दलिया दूध के साथ या हरी सब्जियों से मिश्रित दोनों ही प्रकार का खाया जाना हितकारी है।
जौ का सत्तू गुड़िया शक्कर के साथ पीएं।
गेहूँ के दानों को रोटी सेंकने के तवे पर धीमी आँच पर लाल रंग होने तक सिंकाई करें। ठण्डा होने पर इन्हें पीस कर दरदरा पाऊडर बना लें। एक ग्लास गर्म पानी में दो चम्मच दूध, दो चम्मच देशी चीनी तथा एक चम्मच सिकें हुए गेहूँ का पाऊडर मिला कर सुबह तथा शाम को चाय के जैसे पीने से कब्ज दूर हो जाती है।

अंकुरित अनाज मूंग, चना, गेहूँ, मूंगफली, दाना मैथी, किशमिश व मुनक्का आदि को रात्रि भिगोंए और प्रातः खाएं।
कठोर कब्ज की स्थिति में एक ग्लास गर्म दूध में एक चम्मच आँवला पाऊडर रात को पीकर सोने से मल खुल कर बाहर खिसकता है। इस प्रयोग से दिन में दो-तीन बार तक मल त्याग के लिए जाना पड़ सकता है। चिंता नहीं करें यह कोष्ठ खाली करने की अच्छी क्रिया है।
पानी व तैल का एनिमा लिया जा सकता है।
प्रातः-सांय भ्रमण, योगासन तथा गतिविधियों के साथ शारीरिक क्रियाशीलता बनाए रखें।
सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले पाँच मिनट पेट पर थप्पी जरूर दें।
मिट्टी पट्टी आंतों की गर्मी शांत करने तथा मल को बिना किसी हानि के बाहर निकाल फैंकने में सक्षम है।
पर्याप्त मात्रा में जल ग्रहण करें। भोजन के बीच-बीच में तथा भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीएं।
भोजन के प्रत्येक कोर को धीरे-धीरे 32 बार से अधिक तक चबाया जाना चाहिए जब तक कि आहार स्वतः ही गले में आगे खिसकने न लगें।

आहार बदलिए-
गाजर, पपीता, टमाटर, मैथी, पालक व अन्य हरी सब्जियों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें। अमरूद व नाशपति जबरदस्त कब्ज नाशक है। तला-भुना, गरिष्ठ, मैदा, चीनी, नमक, फास्ट फुड आहार का कम से कम सेवन किया जाना चाहिए। कब्ज एक बीमारी सौ सरल घरेलू उपचार के लिए आहार बदलिए।
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