पतली और छरहरी कमर से सौन्दर्य बढ़ाए-
पेट व कमर पर अनावश्यक चर्बी नहीं आ पाए इसके लिए प्रयासरस रहें।
संतुलित खान-पान व योग-व्यायाम प्रतिदिन करें।
प्राकृतिक तरीकों से कमर पतली बनाने हेतु प्रयास करें। कमर पतली बनाए रखने के लिए नृत्य, रस्सी कूदना व साईक्लिंग उपलब्धता अनुसार करें।
कमर की सूक्ष्म यौगिक क्रियाएं करें।

अप्राकृतिक तरीके से कमर पतला करने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। वक्षस्थल से लगभग 6 इंच कमर का हिस्सा कम होना चाहिए। अप्राकृतिक तरीके से कमर पतली करने के पीछे भागने पर रक्त संचालन मंे व्यवधान, फेफड़ों पर हानिकारक प्रभाव, गर्भाशय संबंधी समस्याएं व कमर दर्द की पीड़ा आदि प्रकट हो सकते हैं।

नियमित रूप से जैतून के तेल की मालिश करना अच्छा है। तेल की मात्रा कम रखी जाएं और 10-15 मिनट मालिश की जानी चाहिए।
भाप स्नान सप्ताह में दो बार लिया जा सकता है।
नहाते समय तौलिए से रगड़-रगड़ कर ष्शरीर की सफाई की जानी चाहिए।
कमर व पेट के हिस्से पर बाल उगने की दशा में जौ, बेसन व चावल के आटे में कच्चा दूध व नीबू का रस मिलाकर उबटन लगाकर मलें और साफ पानी से धो लें।
ध्यान रखें –
अधिक ऊँचा तौलिया सिर के नीचे लगाकर नहीं सोएं, फोम के गद्दों पर ष्शयन करना हानिकारक है। भोजन के तुरंत बाद पेशाब जाने से कमर का सौंदर्य बना रहता है साथ ही घुटनों में दर्द की शिकायत भी नहीं होती है।
पपीते का सेवन कमर का सौन्दर्य बढ़ाता है। पपीते का लेप शरीर व कमर पर लगाने से चार-चाँद लग जाते हैं।
छरहरी कमर के लिए व्यायाम
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। हाथांे की हथेलियों को सिर के नीचे रखें। दोनों पैरों को आपस में सटाकर रखें। श्वास लेते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को सीधा रखते हुए 90 डिग्री तक ऊपर उठाए। तलवा आसमान की ओर रहें। क्षमता और सामर्थ्य अनुसार कुछ क्षण रूकें और धीरे-धीरे श्वास बाहर निकालते हुए पैरों की स्थिति सीधी रखते हुए धीरे-धीरे जमीन की ओर लाएं। इस क्रिया की 10 आवृत्ति तक क्षमता अनुसार की जा सकती है।
पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। हाथांे की हथेलियों को जांघों के पास रखें और ष्श्वास गति सामान्य रखते हुए साईक्लिंग करें। पाँच मिनट तक अभ्यास करें।

आसन पर सीधे खड़े हो जाए और दोनों पैरों के मध्य एक से डेढ़ फुट का फासला रखें और सामान्य गति से श्वास लेते हुए कमर के हिस्से को घड़ी की दिशा और विपरीत दिशा में घुमाएं।

पतली और छरहरी कमर आसानी से आसानी से बनाने के लिए आसन पर सीधे खड़े हो जाए और दोनों पैरों को आपस में सटा कर रखें। लम्बा ष्श्वास लेते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए नमस्कार मुद्रा बनालें। कोहनियां बिल्कुल सीधी रखें और अंगुलिया आसमान की ओर रहें। ष्श्वास छोड़ते हुए कमर को दाईं ओर मोड़े। क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रूकें पुनः पूर्व स्थिति में आएं और बाईं ओर कमर को मोड़ें। इस क्रिया की 10 आवृत्तियां करें।
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