शहद को जानकर आप हो जाएंगे हैरान (भाग-1)

शहद फूलों का सार अर्थात् अमृत है। शहद के गुणों का सार भिन्न-भिन्न मौसम, फूलों की प्रकृति,
शहद में विटामिन ए, बी1, बी2, बी3, बी5, बी6 और बी 12 के साथ विटामिन सी और के भी कुछ मात्रा में पाया जाता है।
शहद में लगभग 75 प्रतिशत शर्करा फ्रूक्टोज, माल्टोज, लेक्टोज व ग्लूकोज के रूप में मुख्यतः उपस्थित होती है।
शहद में लगभग 15-18 प्रतिशत पानी होता है साथ ही प्रोटीन, फॉस्फोरस, वसा, एन्जाईम्स और परिवर्तनशील सुगंधित पदार्थ जैसे कि गोंद, मोम, डैक्सट्रिन्स और क्लोरोफिल आदि भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त शहद में आयोडीन, फासफोरस, लौह तत्त्व और कैल्शियम भी पाया जाता है।
शहद को खाने के पहले, खाने के बाद या खाने के साथ आवश्यकता और प्रयोग के स्तर पर लिया जा सकता है।
एक पौष्टिक व संतुलित आहार में जो तत्त्व हमें लेने चाहिए, यह सब शहद के सेवन से मिल जाते है।
अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी और आवाज ही नहीं निकल पाने की स्थिति में शहद का सेवन नई ऊर्जा देकर नया जीवन प्रदान करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
शहद के गुणों के कारण ही भारतीय परम्परा में जन्म के तुरंत बाद से मृत्यु तक शहद लेने की परम्परा है।
बच्चों को दूध के साथ शहद खिलाने से बच्चे ऊर्जावान, तंदुरूस्त और बीमारी से मुक्त हो जाते हैं।
शहद का सेवन शरीर के अंगों को स्वस्थ रखता है। त्वचा को सुंदर, कमनीय तथा स्निग्ध बनाता है।
शहद का सेवन हिमोग्लोबीन का स्तर बढ़ाता है तथा रक्त प्रवाह संतुलित रखता है।
शहद मात्र 5 मिनट में पच जाता है। यह हृदय को बल प्रदान करता है। रक्त परिसंचरण तंत्र में पहँुच कर तुरंत शक्ति प्रदान करता है।
प्रोढ़ावस्था और वृद्धावस्था में भी जवान जैसी ऊर्जा बनाए रखता है।
खराब केलोस्ट्रोल का स्तर कम करता है।
शहद श्वसन, तंत्रिका तंत्र की कमजोरी तथा त्वचा संबंधी पीड़ा व रोगों को दूर करता है।
पाचन तंत्र की बीमारियां दूर होती है।

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