आधासीसी दर्द का सरल प्राकृतिक उपचार क्या है? What is the simple natural remedy for migraine?

आधासीसी दर्द का सरल प्राकृतिक उपचार क्या है-

आधा सिर का दर्द होने पर सामान्यतः सिर के एक हिस्से पर कष्टदायक दर्द होता है। इस दर्द के प्रभाव से हाथ-पैर में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना या बुखार जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।

महिलाओं को पुरूषों की अपेक्षा यह रोग अधिक होता है। महिलाओं की शारीरिक स्थिति के कारण अर्थात् मासिक धर्म के समय महिलाओं में यह दर्द अधिक होता है।

आनुवांशिक, अधिक तनाव, क्रोध, उत्तेजना, तेज रोशनी या स्नायु तंत्र में गड़बड़ी आदि आधे सिर के दर्द का कारण हो सकता है।

प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार प्रत्येक रोग का कारण होता है और आधे सिर का दर्द का कारण भी गलत जीवन शैली और दूषित खान-पान ही अधिक माना गया है।

आधे सिर दर्द से मुक्ति पाने हेतु मल मूत्र के समुचित रूप से शरीर से बाहर निकलने के प्रयास किए जाने चाहिए अर्थात् पेट साफ रखना चाहिए।

आधे सिर में दर्द होते ही तुरंत पाद स्नान अर्थात् पैरों का गर्म स्नान 20 मिनट तक लेना चाहिए। इस दौरान प्रारम्भ से अंत तक बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा गर्म पानी पीना चाहिए।

प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में पेट पर ठण्डी मिट्टी पट्टी 20 मिनट रखा जाना चाहिए।

कब्ज की जटिल स्थिति या पेट साफ नहीं रहने पर एनिमा लिया जा सकता है।

दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए जिससे शरीर में स्थित दूषित पदार्थ मल-मूत्र के माध्यम से शरीर से निकल जाए।

त्वचा को पूर्ण साफ रखा जाए। स्पंज बाथ अर्थात् गीले तौलिए से शरीर को भलीं-भांति रगड़ना चाहिए जिससे त्वचा के रोम कूप अच्छी तरह खुल जाते है और त्वचा के छिद्रो से गंदगी बाहर निकल जाती है।
रोज सुबह दो किलोमीटर शुद्ध वायु में भ्रमण बहुत ही लाभदायक है। भ्रमण के दौरान पसीने के रूप में भी शरीर से गंदगी बाहर निकलती है।

सबसे महत्त्वपूर्ण बात आहार पर टिकती है। जब तक आहार व्यवस्था नहीं सुधरेगी तब तक किसी भी उपचार का पूर्ण लाभ नहीं मिल सकता।

मनुष्य का रक्त क्षारीय है जब तक खून में क्षारत्त्व बना रहता है तब तक व्यक्ति स्वस्थ रहता है किंतु जब खून में अम्लता अधिक होने लगती है तब रोग भी प्रकट होने लगते है, इसलिए सर्वप्रथम क्षारधर्मी आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए।

आधासीसी दर्द का सरल प्राकृतिक उपचार है, चोकर सहित आटा, कनी वाले चावल, फल व सब्जियों की मात्रा आहार में अधिक रखनी चाहिए क्योंकि यह सब क्षारधर्मी है। इनके प्रयोग से शरीर के संचालन की क्रियाएं सुचारू रूप से होती है अन्य पदार्थ अम्लता वाले होते है जिनका प्रयोग कम से कम करना चाहिए।

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