प्री नेटल योग क्या है? और क्या करें? What is Pre Natal Yoga? What else to do?

प्री नेटल योग क्या है? और क्या करें-गर्भावस्था में भी फिट रहा जा सकता है। प्रसव से पहले अर्थात् गर्भावस्था के दौरान किया जाने वाला योग प्री नेटल योग कहा जाता है। चिकित्सक की देखरेख में यदि गर्भवती प्री नेटल योग करती रहें तो गर्भावस्था में होने वाली शारीरिक और मानसिक मुश्किलों से बचा जा सकता है। मस्तिष्क की उथल-पुथल, तनाव, नकारात्मक विचार, क्रोध व अन्य समस्याएं को दूर रखा जा सकता है।

अधिक आयु अर्थात् 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भवती हुआ जा सकता है। यदि प्रारम्भ से योग व व्यायाम के अभ्यास के साथ संतुलित जीवन-शैली और पौष्टिक आहार भी लिया जा रहा हो।

गर्भावस्था के प्रारम्भिक तीन माह में खड़े रह कर करने वाले योगासन किए जा सकते हैं। चार, पाँच व छठे महीने के दौरान आगे की ओर झुकने अर्थात् पेट पर दबाव देने वाले आसन करने से बचना चाहिए।

सात, आठ व नौ माह के प्रारम्भ तक सामान्य आसन भी चिकित्सक की देखरेख में किए जाने चाहिए। हाथ, पैरों की सूक्ष्म यौगिक क्रियाएं, प्राणायाम व ध्यान का अभ्यास भी गर्भावस्था के दौरान अवश्य करने चाहिए जिससे चित्त शांत रहता है।

त्रिकोणासन

स्वच्छ व हवादार स्थान पर साफ-सुथरे आसन पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच दो या तीन फीट का फासला शारीरिक संतुलन बनाते हुए रखें। लम्बा गहरा श्वास लें। लम्बा गहरा श्वास बाहर निकालते हुए दाईं ओर झुकें। दायां हाथ दाएं पैर के पास स्थापित करें या दाएं हाथ से पैर के पंजों को छुए। गर्दन और बाएं हाथ को बाईं ओर आसमान की ओर घुमाएं। बाईं हाथ की अंगुलिया आसमान की ओर बिल्कुल सीधी रहें और दृष्टि भी आसमान की ओर रहें। दोनों हाथ समानान्तर रहें। क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रूकें और धीरे-धीरे श्वास लेते हुए पुनः प्रारम्भिक स्थिति में आएं। अब यही क्रिया विपरीत दिशा में करें अर्थात् लम्बा गहरा श्वास बाहर निकालते हुए बाईं ओर झुकें। बायां हाथ बाएं पैर के पास स्थापित करें या बाएं हाथ से पैर के पंजों को छुए। गर्दन और दाएं हाथ को दाईं ओर आसमान की ओर घुमाएं। दाईं हाथ की अंगुलिया आसमान की ओर बिल्कुल सीधी रहें और दृष्टि भी आसमान की ओर रहें। दोनों हाथ समानान्तर रहें। क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रूकें और धीरे-धीरे श्वास लेते हुए पुनः प्रारम्भिक स्थिति में आएं।

तितली आसन

स्वच्छ व हवादार स्थान पर साफ-सुथरे आसन पर सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। दोनों पैरों की सामने की ओर लाएं और दोनों एड़िया आपस में सटा लें अर्थात् नमस्ते की मुद्रा में रखें। गर्दन व मेरूदण्ड सीधा रखें और प्रयास करें की दोनों एड़िया अधिकतम भीतर की ओर खिचीं रहें। हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाते हुए पंजों को पकड़ लें और दोनों घुटनों को ऊपर-नीचे यथा सम्भव हिलाएं। घुटने जमीन को छुए।

उत्कटासन

स्वच्छ व हवादार स्थान पर साफ-सुथरे आसन पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैर आपस में सटा लें। दोनों हथेलियां जांघा के पास रखें। लम्बा गहरा श्वास लेते हुए दोनों हाथों को कंधे के समानान्तर सामने की ओर लाएं हथेलियां जमीन की ओर रहें। धीरे-धीरे लम्बा गहरा श्वास बाहर निकालते हुए घुटने मोड़ते हुए कुर्सी पर बैठने की स्थिति बनाएं।ष्शारीरिक संतुलन बनाए रखें। हाथों से नमस्कार मुद्रा बनाएं और हाथों को सिर के ऊपर सीधा ले जाएं। कुछ क्षण क्षमता व सामर्थ्य अनुसार रूकें। धीरे-धीरे लम्बा गहरा श्वास लेते हुए पुनः प्रारम्भिक स्थिति में आएं।


प्री नेटल योगाभ्यास करने से पीठ व कमर दर्द आदि से बचा जा सकता है किंतु पुनः ध्यान रखें कि बिना किसी योग्य व प्रशिक्षित प्रशिक्षक के बिना योगासन इत्यादि का अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए।

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