अवसाद को दूर कैसे भगाएं-
घर के सदस्यों व मित्रों के साथ रोज कुछ पल जरूर बैठें और जानें कि इनके साथ क्या और कैसा चल रहा है?
अपनों व मित्रों के साथ दिल की बातें जरूर परस्पर शेयर करना चाहिए। नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदल कर अवसाद व आत्महत्या जैसी स्थितियों को रोका जा सकता है।

प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ रही है और सहयोग भावना बिल्कुल खो रही है। आत्म मंथन और आत्म चिंतन दोनों करके व्यक्तित्व में निखार लाया जा सकता है।
माता-पिता का कर्तव्य है कि अधिक लाड़-प्यार को दूर रख कर बच्चों के अच्छे पालन-पोषण व संस्कार के साथ धैर्य रखना व सहयोग करना भी जीवनशैली में शामिल करें और ऐसा नियमित सिखाएं।

अधिक अवसाद जनक स्थिति के बाद कोई आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा लें इससे बचने के लिए कारण और व्यवहार पर नियमित नजर रखी जानी चाहिए और समाधान ढूंढ़ना चाहिए।
अवसाद आनुवांशिक, परिस्थितिवश, कमजोर व्यक्तित्व, बेरोजगारी, पारिवारिक कलह, क्लेश, असफलता, आर्थिक व सामाजिक संकट या असफलता आदि के कारण उत्पन्न हो सकता है किंतु अवसाद का उपचार भी संभव है।

अस्त-व्यस्त व आलसभरी दिनचर्या को छोड़कर संतुलित दिनचर्या अवसाद से दूर रहने के लिए आवश्यक है।
अधिक महत्त्वकांक्षा भी गर्त में ले जाती है इसलिए इच्छाएं भी क्षमता व सामर्थ्य के अनुसार रखी जाना बेहतर है।
धूम्रपान, तम्बाकू, नशा व शराब आदि की लत अवसाद की प्रवृत्ति पैदा करने में सहायक होती है इसलिए इनसे दूर रहने का प्रयास होना चाहिए।

हर रोज खुद के आनन्द के लिए समय जरूर निकालना आना चाहिए।
खुद से नफरत नहीं लगाव महसूस करें और खुद की अहमियत समझकर खुद का खुद से सम्मान करें।
प्रकृति ने जीवन दिया है कर्म करने के लिए तो विश्राम करने के लिए नींद की प्रक्रिया भी दी है जितना महत्त्व जाग कर कर्म करने का है उतना ही महत्त्व गहरी और पूरी नींद का है, इसे नहीं भूलना चाहिए।

उबाऊ और एकरस जीवन से बचना चाहिए। छोटी-छोटी बातों में खुशी और आनन्द ढूंढ़ना चाहिए।
अवसाद को दूर कैसे करने के लिए संतुलित पौष्टिक भोजन और संतुलित जीवन-शैली से आसानी से अवसाद और आत्म हत्या जैसे घातक परिणामों से आसानी से बचाव किया जा सकता है।

Leave a Reply