60 की उम्र के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और इस उम्र में भी फिट रहने के लिए पौषक और संतुलित आहार रोज खाएं।
ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती है, मेटाबाॅलिज्म सिस्टम कमजोर होने लगता है अर्थात् मेटाबाॅलिज्म दर धीमी हो जाती है इसलिए तला-भुना, मसालेदार व प्रोसेस्ड फुड खाने से बचना चाहिए।
ताजा सब्जियों व फलों में अधिक खनिज लवण व फाईबर होते हैं इसलिए इन्हें रोज खाएं।

विटामिन बी ऊर्जा बढ़ाने वाला एंजाइम बनाता है। विटामिन बी युक्त आहार जरूर लें।
ओमेगा बी में फैटी एसिड होता है जोकि हृदय को स्वस्थ रखता है। ताजा सब्जियों में ल्यूटेन व काॅरोटिनोइड आंखों को स्वस्थ बनाए रखता है।
भोजन में चीनी, नमक व सफेद चीजों से परहेज रखना चाहिए। रात को मीठा खाकर नहीं सोना चाहिए अन्यथा दांतों की समस्याएं बढ़ जाती है।

हार्मोन्स संतुलित रखने के लिए तनाव जनक स्थितियों से बचें। अपने दोस्तों से साथ बैठना व हल्की-फुल्की गपषप करने से मन व दिल हल्का रहता है और तनाव से आसानी से बचा जा सकता है।
तेज धूप में जाने से बचना चाहिए अन्यथा इस उम्र में त्वचा में झुर्रियों में बढ़ोतरी तीव्र गति से होने लगती है।
स्वस्थ जीवन-षैली से बढ़ती उम्र में भी फीट रहा जा सकता है और डायबिटिज, हृदय रोग व रक्तचाप जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।
हर छः माह में चिकित्सक के दिषा-निर्देषानुसार षारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जाँच जरूर करवा लेनी चाहिए।

पूरी नींद जरूर लें। समय पर सोएं और समय पर जागने की आदत बना लें। संतुलित नींद लेने से ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन का निर्माण होता है जोकि षरीर की त्वचा में लचीलापन लाकर त्वचा को स्वस्थ रखता है।
खर्राटे की समस्या हो तो उसे चिकित्सक को दिखाएं और खर्राटे दूर करने के उपाय करें अन्यथा खर्राटों से नींद पूरी नहीं होती और थकान व अधिक देर तक सोएं रहने की समस्याएं आने लगती है।
नींद पूरी नहीं लेने पर षरीर में कार्टिसोल हार्मोन का निर्माण होता है जोकि त्वचा की कोषिकाओं को तोड़ने पर कार्य करने लगता है।
आलस्य को एक तरफ रख कर षरीर की क्षमता व सामथ्र्य अनुसार रोज प्रातः भ्रमण, योग, आसन, तैराकी, साईक्लिंग, ध्यान व अन्य षारीरिक व्यायाम आदि जरूर करें।

60 की उम्र के बाद भी इन सबसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मन-मस्तिष्क व हृदय स्वस्थ रहता है।
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