नवदूध क्या है और जानिए यह क्यों जरूरी है – प्रसव के बाद माता के स्तनों से स्तनों से पोषक तत्त्वों, वृद्धिवर्धक पदार्थों व जीवन रक्षक गुणों से भरपूर गाढ़ा, चिपचिपा व पीले रंग का तरल पदार्थ स्रावित होता है।
इसे नवजात को अवश्य पिलाया जाना चाहिए क्योंकि इसमें रोग प्रतिरोधक कारक व श्वेत रक्त कणिकाएं अधिक मात्रा में होती है जोकि शिशु को संक्रमणों से रक्षा करती है।

माँ का दूध क्यों जरूरी है?
माँ के दूध में जरूरत के करीब सभी पौषक तत्त्व उचित मात्रा व अनुपात में विद्यमान होते है।
जन्म से चार माह तक माँ का दूध सर्वोत्तम आहार है।

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद माँ का दूध पिलाना ष्शुरू कर देना चाहिए क्योंकि स्तन चूसने व माँ तथा शिशु के भावनात्मक प्रेम से दूध का निर्माण जल्दी होता है।
बच्चे का अमाशय छोटा होता है अल्प मात्रा में बच्चे द्वारा दूध को ग्रहण किया जाता है।
बच्चे की उचित वृद्धि के लिए दो महिने तक दिन में 7-8 बार दूध पिलाया जाना चाहिए।

माँ का दूध पौष्टिक व संतुलित आहार है।
माँ का दूध बच्चे के कोमल पाचन तंत्र के अनुकूल होता है।
माँ का दूध बच्चे की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
गाय, भैंस, बकरी केन की दूध में पाई जाने वाले खनिज लवण व प्रोटीन की अधिक मात्रा बच्चे के लिए उपयुक्त नहीं होती है क्योंकि यह बच्चे के अविकसित उत्सर्जन तंत्र गुर्दे व अन्य तंत्र पर बुरा प्रभाव डालती है।
माँ के दूध में कार्बोज, वसा अम्ल, सुरक्षात्मक तत्त्प विटामिन ए व ई आदि शिशु के लिए बहुत ही लाभदायक है।
यह शिशु की संक्रमणों से रक्षा करता है, प्रदूषण रहित होता है, सुरक्षित व आसानी से उपलब्ध होता है, किफायती होता है, माँ व बच्चे में प्रेम, स्नेह व संबंध सुदृढ़ करता है।
नवदूध क्या है और क्यों जरूरी है हम जान गए है कि 2 से 4 माह तक आवश्यकतानुरूप दूध पिलाने की एक-दो आवृत्ति कम की जा सकती है।
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