नपुसंकता व कमजोरी दूर करने के लिए –
सामग्री-
उड़द की दाल आधा किलो।
दूध 125 ग्राम।
शुद्ध गाय का देशी घी आधा किलो।
बादाम और गोंद प्रत्येक 100 ग्राम।
चिरोंजी, पिस्ता, चोप चीनी प्रत्येक 50 ग्राम।

सौंठ, असगंध नागोरी, मूसली व सालम मिश्री प्रत्येक 25 ग्राम।
पीपल, तेजपात, चित्रक छाल, बाल छड़, अकरकरा के फूल व जायफल प्रत्येक 5 ग्राम।
सुरंजान मीठी, बहमन सुर्ख और बहमन सफेद प्रत्येक 10 ग्राम।
जावित्री और बंग भस्म प्रत्येक 2 ग्राम।

निर्माण विधि-
सभी जड़ी बूटियां पंसारी या अत्तार से खरीद लें। अच्छी तरह साफ करें और सभी को अलग-अलग कूट पीस कर बारीक पाऊडर बना कर छलनी से 4-5 बार छान लें जिससे सभी मिश्रण अच्छी तरह से एकसार हो जाएं।
उड़द की दाल साफ करके पानी से अच्छी तरह धो लें और रात्रि पानी में भिगोकर रखें। सुबह दाल को हल्के हाथों से मसल कर छिलके निकाल कर धो लें। धुली हुई दाल को सिलबट्टे या मिक्सी में बारीक पीस लें। पीसी हुई बारीक दाल में दूध डालें और अच्छी तरह मिलाकर दो घंटे के लिए रख दें। दो घंटे बाद इस मिश्रण को धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाएं। बीच-बीच में हिलाते रहें जिससे कि बर्तन पर दाल-दूध का मिश्रण चिपके नहीं। दूध पूरी तरह सूख जाने अर्थात् मिश्रण गाढ़ा हो जाने पर आंच से उतार लें।
कढ़ाई में घी अच्छी तरह गर्म करें और गोंद को घी में डालकर तले। गोंद तलते समय करछी से बराबर हिलाएं। गोंद के अच्छी तरह फूलते ही कढ़ाई से निकाल कर ठण्डा करें और कूट कर बारीक कर लें।
इसी गर्म घी में उड़द की पीसी दाल तथा अन्य सभी बारीक पीसी हुई सामग्री (गोंद, बादाम, चिरोंजी व पिस्ता को छोड़कर) डालकर अच्छी तरह हिला-हिला कर मिलाकर आंच से उतार लें।
चीनी की दो तार की चाशनी बना लें और इस तैयार मिश्रण को चाशनी में डालकर बराबर मिला लें।
ठण्डा होने पर तलने के बाद कूटा हुआ गोंद, बादाम, चिरोंजी व पिस्ता बारीक-बारीक कतर कर डाल दें और एकसार मिला लें। नीबू के आकार के छोटे-छोटे लड्डू बनाकर रख लें। रात्रि सोते समय एक लड्डू खूब चबा-चबा कर खाएं और साथ में स्वाद व आवश्यकता अनुसार मिश्री मिला गुनगुना दूध भी घूंट-घूंट पीते रहें।

नपुसंकता व कमजोरी दूर करने के लिए सर्दियों में चार-पांच महीने तक इसका प्रयोग करने से बल, वीर्य और शक्ति बनी रहती है।

तीनों भोजन निश्चित समय पर किया जाना चाहिए। रात्रि भोजन 7 बजे तक जरूर कर लेना चाहिए।
संतुलित दैनिक चर्या व भोजन के साथ अनुशासित रहें।
नशा, तम्बाकू, तेज व चटपटा आहार, गरिष्ठ व तले-भुने भोजन व बाजारू खाद्य पदार्थों का सेवन इन दिनों बिल्कुल नहीं करें। मन शुद्ध व प्रसन्न रखने के लिए सुबह-शाम ईश्वर स्मरण जरूर करें।
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